देश के 10 राज्यों में डबल म्यूटेंट वाले कोरोना वायरस का कहर, दिल्ली में UK वाले स्ट्रेन का प्रभाव // THE ROYAL NEWS
गुरुवार, अप्रैल 15, 2021
भारत में कोरोना का संक्रमण तेज रफ्तार से अपने पैर पसार रहा है। आज दो लाख से अधिक नए पॉजिटिव केस सामने आए हैं। संक्रमण का सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र में दिख रहा है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि भारत के करीब दस राज्यों में डबल म्यूटेंट वाले कोरोना वायरस का असर देखने को मिला है। वहीं, अगर दिल्ली की बात करें तो यहां ब्रिटेन वाले स्ट्रेन मिले हैं।
समाचार चैनल एनडीटीवी को स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, गुजरात, कर्नाटक और मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल हैं जहां डबल म्यूटेंट वाले वायरस पाए गए हैं। सूत्रों ने कहा है कि ये म्यूटेंट COVID-19 मामलों में तेजी से वृद्धि में भूमिका निभा रहे हैं।
हालांकि, मंत्रालय के सूत्रों ने यह भी कहा कि फिलहाल यह नहीं कहा जा सकता है कि मामलों में वृद्धि के लिए डबल म्यूटेंट 100 प्रतिशत जिम्मेदार हैं। सूत्रों ने कहा कि दिल्ली का वायरस के यूके वाले स्ट्रेन का मिश्रण है। पंजाब में कोरोना के 80 प्रतिशत मरीजों में में ब्रिटिश स्ट्रेन पाया गया। महाराष्ट्र में लगभग 60 प्रतिशत मामलों में डबल म्यूटेशन पाया गया है। हालांकि मुंबई में ऐसे केस सामने नहीं आए हैं।
सूत्रों ने कहा कि 18 से 19 राज्यों, या देश के 70 से 80 जिलों में यूके वाला स्ट्रेन मिलने की सूचना है। दक्षिण अफ्रीकी और ब्राज़ीलियाई वेरिएंट की उपस्थिति कम जिलों तक सीमित है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि जिन राज्यों में डबल म्यूटेंट का पता लगाया जा रहा है, सरकार उन राज्यों के साथ सूचना साझा कर रही है। राज्य निगरानी अधिकारी फिर जमीनी कार्य योजना तय करते हैं।
क्या है डबल म्यूटेंट वायरस?
यह वायरस का वो रूप है, जिसके जीनोम में दो बार बदलाव हो चुका है। वैसे वायरस के जीनोमिक वेरिएंट में बदलाव होना आम बात है। दरअसल वायरस खुद को लंबे समय तक प्रभावी रखने के लिए लगातार अपनी जेनेटिक संरचना में बदलाव लाते रहते हैं ताकि उन्हें मारा न जा सके। डबल म्यूटेशन तब होता है जब वायरस के दो म्यूटेटेड स्ट्रेन मिलते हैं और तीसरा स्ट्रेन बनता है। भारत में रिपोर्ट की गई डबल म्यूटेंट वायरस E484Q और L452R के मिलने के प्रभाव से बना है। L452R स्ट्रेन संयुक्त राज्य अमेरिका में कैलिफोर्निया में पाया जाता है और E484Q स्ट्रेन स्वदेशी है।
शरीर में बढ़ जाता है वायरल लोड
कई बार म्यूटेशन के बाद वायरस पहले से कमजोर हो जाता है लेकिन कई बार म्यूटेशन की यह प्रक्रिया वायरस को काफी खतरनाक बना देती है। ऐसे में वायरस हमारे शरीर की किसी कोशिका पर हमला करते हैं तो कोशिका कुछ ही घंटों के अंदर वायरस की हजारों कॉपीज बना देती है। इससे शरीर में वायरस लोड तेजी से बढ़ता है और मरीज जल्दी ही बीमारी की गंभीर अवस्था में पहुंच जाता है।
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