भारत और चीनी सैनिकों के बीच बीती 15 मई की रात को गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प में भारतीय सैनिकों की सीमित संख्या बल ने चीनी सैनिकों के झुंड को जिस तरह से मात दी है। उसने पूरी दुनिया के सामने भारतीय सेना की बहादुरी का परचम लहरा दिया है।
भारत-चीन सीमा विवाद के बीच बीती 15 मई को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों (People's Liberation Army) ने एक खतरनाक साजिश के तहत भारतीय जवानों पर हमला बोल दिया था। हालांकि, चीन सैनिकों की तरफ से अचानक हुए इस हमले में पहले भारत जवानों को बड़ी क्षति पहुंची, मगर उसके बाद जिस तरह से बिहार रेजीमेंट के जवानों ने मोर्चा संभाला, चीनी सैनिकों की हालत खराब कर दी।
जानकारी के अनुसार, हिंसक हमले में अपने कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी. संतोष बाबू के शहीद होने के बाद बिहार रेजीमेंट के जवानों का रौद्र रूप देखकर चीनी सैनिक हक्के बक्के रह गए। भारतीय सैनिकों ने एक-एक कर 18 चीनी सैनिकों की गर्दन तोड़ दी। एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि कम से कम 18 चीनी सैनिकों का गर्दन की हड्डी टूट चुकी थी और सर झूल रहा था। कुछ के चेहरे इतनी बुरी तरह से कुचल दिये गये थे कि उन्हें पहचान पाना संभव नहीं था।
दरअसल, उस रात बिहार रेजीमेंट के जवानों ने बहादुरी की कहानी दुनिया के लिए एक मिसाल बन गयी है। उस रात चीनी सैनिकों की संख्या भारतीय सेना की तुलना में 5 गुना अधिक थी। लेकिन फिर भी हमारे बहादुर जवानों ने चीनी सेना को ऐसा सबक सिखाया कि अब वह शांति से बातचीत को सुलझाने की बात कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, हिंसक हमले में अपने कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी. संतोष बाबू के शहीद होने के बाद बिहार रेजीमेंट के जवानों का रौद्र रूप देखकर चीनी सैनिक हक्के बक्के रह गए। भारतीय सैनिकों ने एक-एक कर 18 चीनी सैनिकों की गर्दन तोड़ दी। एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि कम से कम 18 चीनी सैनिकों का गर्दन की हड्डी टूट चुकी थी और सर झूल रहा था। कुछ के चेहरे इतनी बुरी तरह से कुचल दिये गये थे कि उन्हें पहचान पाना संभव नहीं था।
दरअसल, उस रात बिहार रेजीमेंट के जवानों ने बहादुरी की कहानी दुनिया के लिए एक मिसाल बन गयी है। उस रात चीनी सैनिकों की संख्या भारतीय सेना की तुलना में 5 गुना अधिक थी। लेकिन फिर भी हमारे बहादुर जवानों ने चीनी सेना को ऐसा सबक सिखाया कि अब वह शांति से बातचीत को सुलझाने की बात कर रहा है।
