संवाददाता: साबिर अली
पश्चिम चम्पारण मैनाटांड़ प्रखंड के सुखलही गांव के समीप करताहा नदी पर बना पुल 20 वर्षीय पुल जर्जर हो चुका है। भारी वाहनों के दबाव से यह पुल कभी भी ध्वस्त हो सकता है। इसे बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीण शेख बैदुल्लाह आलम ने बताया कि मैनाटांड़ से नरकटियागंज अनुमंडल जोड़ने वाली यह पुल है।
इस पुल को पार करके खैरवा, पिराड़ी, मथुरा, भसुरारी, नौतनवा, पचमवा, डीके शिकारपुर स्टेट, बस्ठा, रामनगरी, सगरौवा, महुआवा आदि गांव में जाकर मिलता है। उन्होंने बताया कि विगत 15 दिनों में इस पर एक मौत और तीन लोगों के दुर्घटना हो चुका है।
सुखलही गौरीपुर निवासी विरेंद्र यादव की पत्नी को इस पुल पर गिरने से उनकी मौत हो गई। जबकि पीपरपाती निवासी 25 वर्षीय युवक के पैर टूट गया था,भसुरारी निवासी 20 वर्षीय युवक का हाथ टूट गया आदि इस तरह के कई घटनाएं हो चुकी है। इधर बता दे कि 25 वर्ष पूर्व यह पुल बने थे तब कच्ची सड़क थी। करीब 10 वर्ष पूर्व इस पथ का पक्कीकरण हुआ। लेकिन पुल का जीर्णोद्धार नहीं हुआ।
पुल का रेलिंग करीब 10 सालों से ध्वस्त हो चुकी है। ऐसे में कब वाहन नदी में पलट जाएंगे कहना मुश्किल है। इस पुल पर 24 घंटे छोटे-बड़े वाहनों का परिचालन होता है। जर्जर पुल के बीच में लोहे की दरारें टूट चुकी है,जिसे देखकर वाहन चालकों में बराबर डर व भय बना रहता है। सुखलही पंचायत के मुखिया, सरपंच व पंच के सहयोग से टूटे पुल के बीचो-बीच यात्रियों के लिए कभी मिट्टी गिराते हैं, तो कभी लकड़ी का बोटा रख किसी तरह यात्रियों का आने जाने का सुविधा देते रहते हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि मैनाटांड़ प्रखंड में अधिकतम गन्ना उत्पाद होने के वजह से नरकटियागंज शुगर मिल में गन्ना गिराने के लिए सभी किसान ट्रैक्टर लोडर गन्ना लेकर इसी जर्जर पुल से होकर जाते हैं,फिर भी किसी भी अधिकारियों और प्रतिनिधियों को इस जर्जर पुल पर ध्यान नहीं है।
