संवाददाता: साबिर अली
यहां मान्यता है कि इस दिन ऐसा करने से देवी प्रकोप से निजात मिलती है।थारू समुदाय बाहुल्य इस गांव के लोगों में आज भी अनोखी प्रथा जीवीत है। इस प्रथा के चलते नवमी के दिन लोग अपने साथ-साथ मवेशियों को भी छोड़ने की हिम्मत नहीं करते हैं।
लोग जंगल में जाकर वहीं, पूरा दिन बिताते हैं। आधुनिकता के इस दौर में इस गांव के लोग अंधविश्वास की दुनिया में जी रहे हैं।
गांव के लोगों के मुताबिक इस प्रथा के पीछे की वजह देवी प्रकोप से निजात पाना है। वर्षों पहले इस गांव में महामारी आई थी गांव में अक्सर आग लगती थी। चेचक, हैजा जैसी बीमारियों का प्रकोप रहता था।
,हर साल प्राकृतिक आपदा से गांव में तबाही का मंजर नजर आता था। लिहाजा, इससे निजात पाने के लिए यहां एक संत ने साधना कर ऐसा करने का फरमान सुनाया था।
