संतोष कुमार की रिपोर्ट
करमाटांड़ जामताड़ा
करमाटांड स्थित नंदनकानन में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस श्री धाम वृंदावन के प्रख्यात भागवत प्रवक्ता श्री हित ललित वल्लभ नागार्च जी महाराज ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीव जब जन्म लेता है, तब माया साथ आती है और मनुष्य अपने शरीर व माया को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है ,कर्म ऐसा करो जो निष्काम हो वही सच्ची भक्ति है। जीव जब गर्भ में रहता है तब उसे गर्म में प्रभु का दर्शन होता है। जब वह जन्म लेता है तब बोलता है कहां-कहां वह कहां है जिसका मुझे गर्भ में दर्शन हो रहा था। गर्भ में जीव कहता है कि मुझे इसमें से निकालो मैं आपका भजन करूंगा। लेकिन गर्भ के बाहर माया में लिप्त हो जाता है और भूल जाता है कि मैंने वचन दिया था कि भजन करूंगा, अतःप्रभु आश्रय में कल्याण निश्चित है। प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए महाराज जी ने ध्रुव चरित्र , सती चरित्र का वर्णन किया। ध्रुव चरित्र में बताया कि ध्रुव की तरह अटल प्रतिज्ञा होनी चाहिए ध्रुव ने छोटी सी उम्र में प्रभु का साक्षात्कार किया। सती चरित्र में बताया कि अभिमान युक्त यज्ञ कभी सफल नहीं होते। प्रजापति दक्ष ने अपने यज्ञ में भगवान शंकर का अपमान किया, जिस कारण यज्ञ विध्वंस हुआ। आगे व्याख्यान में जड़भरत चरित्र, नरकों का वर्णन, अजामिल उपाख्यान, प्रहलाद चरित्र का वर्णन किया। भारत महिमा में कहा कि भारत भूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ है क्योंकि न तो स्वर्ग में गंगा बहती है न यमुना, ना राम कथा होती है ना कृष्ण कथा। प्रह्लाद चरित्र में बताया कि भक्ति नौ प्रकार की होती है, अगर जीव उसमें से एक का भी सहारा ले ले तो उद्धार सुनिश्चित है ।तृतीय दिवस की कथा में महाप्रसाद की व्यवस्था सिंह मेडिकल के सौजन्य से की गई थी।मौके पर महंत किशोरी शरण ,रामप्रसाद मंडल, बिमल जयसवाल, रामरतन मंडल, बलराम साह, मितेश साह,सुनील गुप्ता,उत्तम साह, ,विकास गुप्ता,विक्रम गुप्ता, गौतम शर्मा,नितेश गुप्ता,सिया गुड़िया शरण, प्रदीप गुप्ता, भगीरथ मंडल,हिरालाल रवानी,सीताराम साह,जितेंद्र गुप्ता, चंदन गुप्ता,बबलू गुप्ता, पारस यादव, मनोहर यादव, दीपक गुप्ता, अरबिंद सर्राफ,देवकी बोगी महेंद्र रजक, डॉ परेश दत्ता,रामजी साह, बजरंग यादव,सुभाष यादव, गौरव यादव,साहिल साह, सुनील यादव,कुंदन यादव, चुनु मंडल,राजेश गुप्ता , सुनील साह समेत सैकड़ो श्रोता उपस्थित थे।
