सेख समीम की रिपोर्ट
जामताड़ा : डॉ महेंद्रालाल सरकार भारतीय होम्योपैथी में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं उन्होंने होम्योपैथी की भरपूर सेवा की तथा अपने अनुयायियों / अनुगामियों का वे हमेशा पथ प्रदर्शन करते रहे। उक्त बातें द हैनिमैनियन होम्योपैथिक रिसर्च सेंटर के रिसर्च प्रमुख डॉक्टर रहमतुल्लाह रहमत ने उनकी पुण्यतिथि पर कही। उन्होंने कहा कि वे कलकता मेडिकल कॉलेज के दूसरे स्नातक मेडिकल डॉक्टर थे। यद्यपि उन्होंने एलोपैथी की शिक्षा ली थी तथापि उन्होंने होमियोपैथी को अपनाया और उसी के माध्यम से चिकित्सा की। उस युग में जब होम्योपैथी हमारे भारतवर्ष में बहुत ज्यादा फल फूल नहीं पाई थी श्री महेंद्र लाल सरकार जी ने अपने स्तर से इसका प्रचार प्रसार किया। जहां कहीं बैठते थे होम्योपैथी की चर्चा अवश्य करते थे ।यही कारण था कि इनसे प्रभावित होकर बहुत सारे एलोपैथिक डॉक्टर ने होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति अपना ली ।अपने व्यावसायिक जीवन में उन्होंने उस युग के कई महान व्यक्तियों की चिकित्सा की थी, जैसे-बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय, रामकृष्ण परमहंस, त्रिपुरा के महाराज आदि। वे सफल होम्योपैथ के साथ साथ सफल वक्ता , विचारक और वैज्ञानिक भी थे। इण्डियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साईन्स की स्थापना उन्होंने ही की थी। आज हमारे बीच इतनी सुविधाएं उपलब्ध हैं फिर भी हम लोग होम्योपैथी के प्रचार प्रसार से कतराते हैं। कुछ लोग तो ऐसे भी मिल जाते हैं जो होम्योपैथी में ही अपनी पढ़ाई पूर्ण करके डिग्री ले चुके होते हैं और चौक चौराहों पर उसी चिकित्सा पद्धति की आलोचना भी करते हैं । मुझे लगता है कि ऐसा वे इसलिए करते हैं क्योंकि उन्होंने अपने पायनियर्स की जीवनी को नहीं पढ़ा है। जो कोई होम्योपैथिक पायनियर्स की जीवनी और उनके कारनामों को पढ़ लेंगे वे अवश्य होम्योपैथी की सेवा और प्रचार प्रसार में लग जाएंगे। जरा सोचिए उस जमाने के हमारे पूर्वज होम्योपैथिक सेवा करते हुए बड़े बड़े संगठन, संस्थान और विश्वविद्यालय तक स्थापित कर डाले और आज हम उनके वंशज उनके बनाए हुए धरोहर को सहेज कर भी नहीं रख पा रहे हैं । नए संस्थान खोलने की बात तो दूर पहले से चल रहे शिक्षण संस्थान एवं संगठन तक को जीवित नहीं रख पा रहे हैं। हमें अपने पायनियर एवं पथ प्रदर्शक के नक्शे कदम पर चलते हुए होम्योपैथी एवं अन्य सामाजिक, शैक्षणिक संगठनों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए ताकि हमारी पहचान बनी रह सके और यही हमारे पायनियर्स के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि डॉ महेंद्र लाल सरकार के अथक प्रयास से होम्योपैथी कोलकाता के संभ्रांत परिवारों में आसानी के साथ पहुंची जहां सिर्फ और सिर्फ लोग एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति को ही जानते थे। हमें भी उनके तरीके को अपनाते हुए होम्योपैथी को उन परिवारों तक पहुंचाना है जहां लोग इससे दूर भागना चाहते हैं क्योंकि यह चिकित्सा पद्धति सस्ती और हानि रहित है और हमें मालूम है कि हमारे देश में अभी भी गरीब लोग ज्यादा बसते हैं। अगर हम महेंद्र लाल सरकार की तरह इसका ज्यादा प्रचार प्रसार करेंगे तो गरीब, निर्धन, असहाय एवं बेबस लोग इसका ज्यादा से ज्यादा लाभ उठा सकेंगे।
