फतेहपुर से सेख समीम
ऑल इंडिया पासमांदा मुस्लिम महाज के संथाल परगना प्रभारी मौलाना सद्दाम हुसैन ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया है कि जलसा से मुस्लिम आवाम में कोई बदलाव नहीं हद से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। फायदा कुछ नहीं जलसा से पहले भी और बाद मे भी गांव में कोई बदलाव नहीं दिखता है। मौलाना सद्दाम ने कहा क्या हमने कभी ऐसा सोचा जिस अजीमुश शान इजलास व कान्फ्रेंस में हम फख्र से शामिल होते हैं। उसका इंतजाम कैसे होता है नहीं सोचा तो अब सोचिए ज़रा कि जलसा के स्टेज पर बैठकर हम सेल्फी लेते हैं और फेसबुक पर डालते हैं और हम दुनिया को बताना चाहते हैं कि अल्लाह ने बड़ी इज़्ज़त दी है। इस स्टेज की चमक के पीछे की कहानी ही कुछ और है। जो हम जानना भी नहीं चाहते कि वह क्या है। भाई सच तो यह है कि स्टेज और जलसे की खूबसूरत शामियाने की व्यवस्था हमारे लिए कोई और नहीं करता, बल्कि मेहमानान ए रसूल के जरिए चंदा उठा कर किया जाता है। उन्हें बाजार और गांवों में भेजा जाता है जहां वे घूम घूम कर 10 रुपैया.5 रुपैया.अनाज - गेहूँ और चावल इकट्ठा करते हैं जो लगभग दो महीने का संघर्ष होता है। हैरत की बात यह है कि इस राशि से मुकर्रिर एवं शायर के लिफाफे तैयार किए जाते हैं। मालूम हो कि जी मुकर्रिरों व शायरों का नजराना बहुत महंगा होता है।और हां ये भी जान लीजिए टेबल पर पुलाव या बिरयानी परोसी जाती है वह भी उसी चंदा के रकम से पेश की जाती है। मुकर्रिर व शायर हजरात सुब्हान अल्लाह,अल्हम्दुलिल्लाह, माशा अल्लाह कहते हैं दबाकर खाते व हंसते बैठ जाते हैं। और फिर कुछ देर बाद उसी जलसा में हलाल व हराम की बात पर लोगों को जबरदस्त तरीके से बेइज्जत करते हैं। इस सच को आप इनकार नहीं कर सकते हैं। अफसोस हम ने बच्चों को मदरसा पढ़ने के लिए भेजा था आलिम ए दिन बनने के लिए भेजा था वह तो चंदा करने का ट्रेनिंग ले रहा है। उनको अभी से चंदा की प्रैक्टिस कराई जा रही है। आवाम की नजरों में उनकी तालीम की वुकअत को घटाया जा रहा है। अरे भाई कोई है ऐसा आलिम ए दिन जो इस मौजु पर किसी जलसा में खिताब कर सकें। मेरी गुजारिश है कि शोला बयानी करने वाले मुकर्रीर अपनी फीस कम कर ले ताकि मेहमानान ए रसूल चंदा करने से बच जाए। दूसरी बात जलसा करने वालों को चाहिए कि वह खुद चंदा करे या अपनी औलाद को टेंपू पर बिठाकर हाथ में टोकन दे दें बोरियां भी साथ लगा दे। कोम के गरीब बच्चे आपकी ख्वाहिश पूरी करने के लिए चंदा नहीं करेगें !
