जामताड़ा सेख समीम
झारखंड में समग्र शिक्षा अभियान के तहत हिंदी विद्यालयों का उत्क्रमण हो रहा है। यह प्रक्रिया सतत झारखंड के गठन के बाद से नियमित है। एनपीएस से प्राथमिक विद्यालय , प्राथमिक विद्यालय से उत्क्रमित मध्य विद्यालय , मध्य विद्यालयों को उत्क्रमित उच्च विद्यालयों, उच्च विद्यालयों को प्लस टू उच्च विद्यालय में उत्क्रमण किया जाता है। उक्त बातें शिक्षाविद कौरेश अंसारी ने कही। राज्य सरकार वहां संसाधनों का भी इंतजाम करती है। चाहे भवन निर्माण , पुस्तकालय कक्ष , प्रयोगशाला कक्ष इत्यादि का मामला हो। मगर झारखंड के गठन होने के बाद एकीकृत बिहार राज्य सरकार द्वारा झारखंड के हिस्से में आए सभी प्रस्वीकृत मदरसों का हाल जस का तस है। सभी मदरसा खंडहर होने के कगार पर है। राज्य सरकार अल्पसंख्यक कल्याण कोष का बजट में प्रावधान रखती है जहां से अल्पसंख्यक निधि द्वारा संसाधनों को पूरा किया जा सकता है। झारखंड के सभी अलग-अलग जिलों में वस्तानिया से लेकर फाजिल कक्षा तक की अलग-अलग मदरसा स्थापित नहीं होने के कारण वस्तानिया पास होने के बाद इन छात्र-छात्राओं को दूसरे जिला में जाकर फोकानिया , मौलवी , आलिम आनर्स एवं फाजिल कक्षा तक पढ़ाई पूरी करनी होती है।राज्य सरकार मदरसा पर ध्यान दे एवं वहां मदरसा पाठ्यक्रम के हिंदी , अंग्रेजी , गणित , उर्दू , फारसी , अरबी , समाज, विज्ञान इत्यादि विषयों के साथ-साथ कंप्यूटर एवं आधुनिक शिक्षा का भी इंतजाम करे ।
