आम नागरिकों का कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर विश्वास कमजोर पड़ता है। तीन सदस्यीय शिष्टमंडल में NCDHR के प्रदेश महासचिव विद्यानंद राम, मानवाधिकार एक्टिविस्ट पारसनाथ अम्बेडकर तथा किरण राम शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में महिला थाना मोतिहारी कांड संख्या 69/26 का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि महिला थाना अध्यक्ष, एसडीपीओ पकड़ीदयाल एवं एसडीपीओ के रीडर द्वारा पॉक्सो एक्ट तथा एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया गया। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि मामले को कमजोर करने तथा आरोपित को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को इस कांड की जांच, पर्यवेक्षण और समीक्षा से तत्काल अलग करने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए सबसे पहले आरोपित हेडमास्टर की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही मामले का स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषी को कठोरतम सजा दिलाई जाए। संगठन ने पूरे घटनाक्रम की जांच सीआईडी के वरीय अधिकारी से कराने, प्राथमिकी में एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(V) जोड़ने, संबंधित एमएस पब्लिक स्कूल की मान्यता रद्द कर विद्यालय को बंद करने तथा पीड़िता को सुरक्षा और सरकार द्वारा निर्धारित राहत राशि उपलब्ध कराने की भी मांग की है। NCDHR के प्रदेश महासचिव विद्यानंद राम ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का राज तभी स्थापित माना जाएगा, जब पीड़ित को समय पर न्याय मिले और दोषियों के विरुद्ध बिना किसी दबाव या पक्षपात के कार्रवाई हो। उनका कहना है कि यदि जांच प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगें, तो निष्पक्षता को लेकर जनता में स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा होता है। इसलिए इस पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग तथा बिहार के पुलिस महानिदेशक को भी ईमेल के माध्यम से भेजी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित अधिकारियों की भूमिका और कथित लापरवाही की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो लोक सेवकों द्वारा कानून की अवहेलना से जुड़े तथ्यों के आधार पर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। संगठन का कहना है कि दुष्कर्म और बाल यौन अपराध जैसे मामलों में जांच की प्रत्येक प्रक्रिया संवेदनशीलता, पारदर्शिता और कानून के अनुरूप होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की देरी या प्रक्रियागत त्रुटि न केवल पीड़ित परिवार की पीड़ा बढ़ाती है, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। इसलिए प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे, पीड़िता की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करे तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करे। ज्ञापन की प्रति जिलाधिकारी कार्यालय को सौंप दी गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन मांगों पर क्या निर्णय लेता है और क्या जांच एवं कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों का संतोषजनक उत्तर दे पाता है।
झांसी दुष्कर्म कांड न्याय में कथित देरी पर प्रशासन घिरा, NCDHR ने डीएम को सौंपा सात सूत्री ज्ञापन, निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की उठाई मांग
मंगलवार, जुलाई 14, 2026
पू. च. मोतिहारी : झांसी दुष्कर्म कांड को लेकर पूर्वी चंपारण में प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान (NCDHR) के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को सात सूत्री ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि इतने संवेदनशील मामले में अब तक अपेक्षित स्तर की कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में बाधा उत्पन्न हो रही है। संगठन का कहना है कि यदि दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में भी समयबद्ध एवं निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती है, तो
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