*सर्वदलीय बैठक में सरकार के साथ पूरा विपक्ष, चाइना के खिलाफ सभी दलों में दिखा गुस्सा, कहा- आप आगे बढ़ें, एकजुट है देश*
लाइव सिटीज,सेंट्रल डेस्क : पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच जारी विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सर्वदलीय बैठक की. बैठक में देश के करीब 20 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिसमें मौजूदा हालात पर चर्चा हुई. बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी मौजूद रहे.
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सभी विपक्षी नेताओं को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प के बाद के मौजूदा हालात की जानकारी दी. रक्षा मंत्री ने विपक्षी नेताओं को यह भी बताया कि भारतीय सेना किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार है.
सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि यह सर्वदलीय बैठक बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी. राष्ट्र को आश्वासन की आवश्यकता है कि यथास्थिति बहाल हो. सोनिया गांधी ने सरकार से पूछा कि माउंटेन स्ट्राइक कोर की वर्तमान स्थिति क्या हां ? इसकी जानकारी नियमित रूप से विपक्षी दलों को दी जानी चाहिए.
उधर ममता बनर्जी ने सर्वदलीय बैठक को राष्ट्र के लिए एक अच्छा संदेश करार देते हुए कहा कि हम अपने जवानों के पीछे एकजुट हैं. चीन में डेमोक्रेसी नहीं है. वे एक तानाशाही हैं. वे वहीं कर सकते हैं जो वे महसूस करते हैं. दूसरी ओर हमें एक साथ काम करना होगा. भारत जीत जाएगा, चीन हार जाएगा. एकता के साथ बोलिए, एकता के साथ सोचें और एकता के साथ काम करें. हम सरकार के साथ हैं.
वहीं जेडीयू की ओर से सर्वदलीय बैठक में शामिल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पीएम नरेन्द्र मोदी का साथ देते हुए कहा कि चीन के खिलाफ पूरे देश मे गुस्सा है. हमारे बीच कोई मतभेद नहीं होना चाहिए. देश पर जब जब विपत्ति आएगी हमसभी एकजुट हैं.
उधर लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी पीएम के निर्णय के साथ होने की बात करते हुए कहा कि देश सबसे पहले है. अगर देख पर कभी आंच आएगी तो राजनीतिक मतभेद भूलाकर हमसभी एक हैं. यहीं भारत की खूबसूरती है.
बता दे कि 15-16 जून की रात को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में भारत के 20 जवानों के शहीद होने पर देश के लोगों में भारी गुस्सा है. यह पिछले पांच दशक से भी ज्यादा समय में दोनों देशों के बीच हुआ सबसे बड़ा सैन्य टकराव है. इस तनाव को निपटने के लिए कई स्तरों पर पहल की जा रही है.

