उन्होंने कहा कि हमें यह अंदाजा नहीं था कि भारत सरकार इस तरह हमारी मदद करेगी और हमलोग एक बार फिर से अपने बच्चों को जिंदा देख सकेंगे।
पांचों भारतीय नागरिक, जो राह भटक कर चीन की सीमा में चले गए थे, वतन लौट आए हैं. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने सभी नागरिकों को रिहा कर दिया है। पांचों भारतीय नागरिक अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले हैं। ये लोग ऊपरी सुवानसिरी में राह भटक कर चीन की सीमा में चले गए थे। सेना के मुताबिक सभी नागरिकों को कोरोना गाइडलाइंस के मुताबिक 14 दिनों के लिए क्वारनटीन रखा गया है। बाद में इन्हें परिवार को सौंपा दिया जाएगा। इन पांचों युवकों के नाम हैं, तोच सिंगकम, प्रसात रिंगलिंग, डोंग्टू इबिया, तनु बाकर और तारु डिरी।
इनके वापस भारत आने से परिवार वाले राहत की सांस ले रहे हैं। 38 साल के तचुंग डिरी यह जान कर खुश हैं कि उनका छोटा भाई तारु डिरी चीन की कस्टडी से बाहर होकर भारत पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि उनका भाई भी उन पांच लोगों में से एक था जिसे दो सितंबर को चीन की सेना उनके होमटाउन नाचो से उठा ले गए थे।
तब से वे एक रात भी सो नहीं पाए। मदद के लिए जानने वाले सभी लोगों के दरवाजे खटखटाए। आखिरकार 8 सितंबर को पता चला कि उनका भाई चीन में है और जिंदा है। हालांकि 12 सितंबर को वो भारत वापस लौट गया है।
तचुंग डिरी ने भावुक होते हुए कहा, 'ये खुशी के आंसू हैं। मेरा भाई वापस आ गया है, यह बात जानकर मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि अपनी खुशी कैसे जाहिर करूं। चीन के साथ सीमा पर तनाव चल रहा है।वहीं सरकार कोविड-19 महामारी का सामना कर रही है। ऐसे में हमलोगों ने उसके वापस लौटने की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन वो सही सलामत वापस लौट आया है।
उन्होंने कहा कि हमें यह अंदाजा नहीं था कि भारत सरकार इस तरह हमारी मदद करेगी और हम लोग एक बार फिर से अपने बच्चों को जिंदा देख सकेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इस बार भारत सरकार ने जिस तरह काम किया है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। हमारे पांचो बच्चे वापस लौट आए हैं। हम सभी परिवार वालों ने खाना-पीना छोड़ दिया था। हम लोग काफी चिंतित थे। हमें यह भी नहीं पता था कि वो सुरक्षित हैं कि नहीं? चीन इस बारे में कोई कंफर्मेशन नहीं दे रहा था और ना ही भारत सरकार की तरफ से कोई जवाब आया था। हमने अपने विधायकों से यह बात बताई, उन्होंने केंद्र सरकार को बताई, आखिरकार सभी के प्रयास से बच्चे वापस आ गए।
बता दें, नाचो, भारत-चीन बॉर्डर से सटा हुए एक गोल इलाका है।अरुणाचल प्रदेश का यह हिस्सा तगिन ट्राइब्स के इलाके के तौर पर जाना जाता है। चीन ने पांचों भारतीय नागरिकों पर इंटेलिजेंस स्टाफ होने का आरोप लगाया था। चीन के सरकारी अखबार ने कहा था कि जिन पांच भारतीय नागरिकों को लेकर चीन पर अपहरण करने का आरोप लगाया जा रहा है वो दरअसल में इंटेलिजेंस स्टाफ हैं। ये सभी लोग चीन की खुफिया जानकारी पाने की कोशिश कर रहे थे।
इसके जवाब में तचुंग डिरी ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि हमलोग का जीवन पूरी तरह से कृषि और शिकार पर निर्भर करता है। इन्हीं कारण से हमें घने जंगलों के बीच भी जाना पड़ता है। चीनी सैनिकों ने इन बच्चों का अपहरण सेरा सेवन इलाके से किया था। जो भारतीय सीमा में आता है. और वो कह रहे हैं कि हमारे बच्चे इंटेलिजेंस एजेंसी के लिए काम करते हैं। यह पूरी तरह गलत है। हमलोग LAC के पास मुश्किल हालातों के बीच रह रहे हैं। जहां प्रत्येकदिन कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चीन हम लोगों के बारे में हमेशा से इस तरह की भाषा का प्रयोग करता है. साल 1962 में चीन ने भारत पर हमला किया था और अरुणाचल प्रदेश को काफी नुकसान पहुंचाया था।लेकिन हम लोगों ने उन्हें तब भी माकूल जवाब दिया था और अब भी दे रहे हैं।यह भारत ही है जो हमलोगों के खाने-पीने से लेकर राशन तक का ख्याल रखता है।
डिरी ने कहा कि अरुणाचल के पांचों बच्चे वापस आ गए हैं, लेकिन चीन इस मौके पर भी हमलोगों पर झूठे और आधारहीन आरोप लगा रहा है।
बता दें कि 5 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश से कांग्रेस विधायक निनॉन्ग एरिंग ने दावा किया था कि अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के पांच लोगों का कथित तौर पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अपहरण कर लिया गया है। रिपोर्ट ये मुताबिक ये पांच लोग मछली पकड़ने के दौरान सीमा भटक गए थे।इस मामले को केंद्रीय मंत्री किरन रिजिूजू ने गंभीरता से केंद्र के सामने उठाया था।
भारत और चीन की सीमा के बीच कई ऐसे इलाके हैं जहां सीमा रेखा स्पष्ट नहीं है। इस वजह से दोनों देशों के नागरिक भूलवश एक दूसरे की सीमा में प्रवेश करते हैं। हाल ही में सिक्किम में चीन के तीन नागरिक रास्ता भटककर भारतीय सीमा में आ गए थे। भारतीय सेना ने इन चीन के इन नागरिकों को तुरंत वापस भेज दिया था।
