पूर्वी चंपारण (कुमार ओंकार):- कोटवा प्रखंड क्षेत्र के सागर चुरामन में काले धान के बाद अब काले गेहूं की खेती शुरू की गई है। जिसकी हरियाली अब खेतों में देखने को मिल रही है। आठ साल के लंबे शोध के बाद कृषि वैज्ञानिकों ने वर्ष 2019 में गेहूं की तीन अलग-अलग रंगों वाली किस्मों को तैयार करने में सफलता प्राप्त की थी ।
पिपराकोठी कोठी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि पंजाब के मोहाली में स्थित नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट ने इन किस्मों को तैयार किया है। अब बैंगनी, काला और नीले रंग की प्रजाति का गेहूं तैयार किया गया है।
किसान प्रयाग देव सिंह ने बताया कि बाहर से काले गेहूं का उन्नत बीज मंगाया गया था ।खेती जीरो टिलेज मशीन के द्वारा की गई है।जिसमें किसी भी तरह का रासायनिक खाद का उपयोग नहीं किया गया है। इसमें समय समय पे सिंचाई एवं वेस्ट डीकंपोजर का उपयोग किया जाएगा।उन्होंने किसानों से अपील की कि जीरो टिलेज से खेती करे जिससे उनके कृषि लागत में कमी आएगी।उन्होंने कहा अगले साल जितने भी किसान काले गेहूं की खेती करना चाहेंगे,वे मेरे पास से उसका बीज ले सकते है।श्री सिंह ने कहा आने वाले समय में अब चंपारण के थाली में काले गेहूं कि रोटी व्यंजनों की स्वाद के साथ-साथ तंदुरस्ती को बढ़ाने में मदद करेगी।
रोगों से लड़ने में है फायदेमंद: रंगीन गेहूं से आपको एंथोक्यानिन की जरूरी मात्रा मिल सकती है। एंथोक्यानिन एक एंटीऑक्सिडेंट है और इसको खाने से ह्रदय रोगों, मधुमेह और मोटापे जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को रोकने में मदद मिलेगी। जहां साधारण गेहूं में इसकी मात्रा पांच पीपीएम होती है, वहीं काले गेंहू में 140 पीपीएम, नीले गेहूं में 80 पीपीएम और बैंगनी गेहूं में 40 पिपीएम होती है।
प्रति एकड़ पैदावार कम: हालांकि इस तरह के गेहूं की प्रति एकड़ पैदावार काफी कम है। जहां सामान्य गेहूं की पैदावार 24 क्विंटल प्रति एकड़ है, वहीं रंगीन गेहूं की प्रति एकड़ पैदावार 17 से 20 क्विंटल है।

