संवाददाता: साबिर अली
बगहा के दो प्रखंड के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग आर्सेनिक युक्त पानी पी रहे हैं। मामले का खुलासा भूविज्ञान विभाग के सर्वे से हुआ है। भू-विज्ञान विभाग पटना के निर्देश के आलोक में नवंबर से फरवरी माह के बीच बगहा अनुमंडल के दो प्रखंड बगहा एक और बगहा दो के एक दर्जन पंचायतों में पीने वाले पानी की जांच की गई। इस दौरान एक दर्जन गांव में आर्सेनिक की ज्यादा मात्रा पाई गई ।
पीने वाले पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने से कई प्रकार की घातक बीमारियां घर कर जाती है। स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों की माने तो पीने योग्य पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने से चर्म रोग कैंसर लीवर रोगों का खतरा सबसे अधिक होता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मनुष्य को प्रति लीटर 10 माइक्रोग्राम असैनिक युक्त पानी पीना चाहिए, अगर पानी में आर्सेनिक की मात्रा से अधिक है तो इसका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
यह जगह है रेड अलर्ट
सर्वे टीम ने नौतनवा, सेमरा, तिनफेडिया, बैरिया खुर्द, सपही, गंगवालिया, बैराटी, कौलाची, सिंगारी, हर्नाटांड़, रामपुर आदि एक दर्जन गांव से करीब 650 सैंपल जांच के लिए इकट्ठा किए गए । सर्वे टीम ने 550 वर्ग किलोमीटर में पानी की जांच की गई। इस दौरान इकट्ठा किए गए सैंपल में से 450 सैंपल की जांच किट से एवं 200 सैंपल का जांच लैब के माध्यम से कराया जा रहा है।
आर्सेनिक युक्त पानी पीने से स्वास्थ्य पर पड़ता है प्रतिकूल असर
भू-विज्ञान विभाग के सहायक वैज्ञानिक ने बताया कि- किट से यह गए जांच में पाया गया कि उक्त गांव में प्रति लीटर पानी में 10 माइक्रोग्राम आर्सेनिक की जगह पर 70 से 80 माइक्रोग्राम आर्सेनिक है जो मानव के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। वहीं भूविज्ञान को विभाग के स्टेट कोऑर्डिनेटर एसके दत्ता ने बताया कि टीम के द्वारा बगहा के एक दर्जन गांव में चापाकल एवं विभिन्न जल स्रोतों से निकलने वाले पानी का सैंपल इकट्ठा कर उसका जांच किया गया। सैंपल में को जांच के लिए कोलकाता स्थित प्रयोगशाला में भेजा गया है