संवाददाता: साबिर अली
वर्तमान में शिक्षिकाओं को शिक्षा देने के लिए नहीं बल्कि हाजिरी बनाने और विधालय से गायब रहने को दी जाती है वेतन। ऐसा ही एक मामला राजकीय प्राथमिक विधालय भरहुआ फतुछापर बथना पंचायत बैरिया प्रखंड से आया है।
बथना पंचायत के ग्रामीण और विधालय के शिक्षक तक वहां शिक्षा देने के लिए पदस्थापित शिक्षिका खुशबु कुमारी के गायब होने का खुलासा कर रहे हैं। खुलासा की पड़ताल पर पहुंची मीडिया ने पाया कि 19 अप्रैल 2022 मंगलवार को भी शिक्षिका खुशबु कुमारी विधालय में बिना किसी लिखित सूचना के गायब थी और यह कोई पहली बार नहीं बल्कि कई सालों से कभी आकस्मिक अवकाश, तो कभी अवैतनिक अवकाश तो कभी विशेषावकाश तो कभी ना जाने कौन कौन से अवकाशों के माध्यम से विधालय में शिक्षा देने के जगह अपने निजी कार्यों में रहना पसंद करती हैं। यदि उनके अवकाशों की जांच ना हो तो वे 2,4 व 6 माह पर विधालय आती हैं और प्रधानाध्यापक के मिलीभगत से अपनी हाजिरी उपस्थिति की दर्ज कर देती हैं। ऐसे में उपस्थिति पंजी के अवलोकन व जांच के पश्चात स्पष्ट रूप से सामने आ सकती है। साथ ही वहाँ उपस्थित बच्चों, शिक्षकों और उन बच्चों के अभिभावकों से भी यह जानकारी प्राप्त हो सकती है कि शिक्षिका खुशबु कुमारी विधालय में पढ़ाने नहीं हाजिरी बनाने के लिए ही विधालय परिसर में अपना पांव रखती हैं।
ऐसे में सोचा जा सकता है कि शिक्षिका खुशबु कुमारी के लिए बच्चों के भविष्य से ज्यादा अपने भविष्य की चिंता ज्यादा है जिससे वो अपना हाजिरी बनाकर अपनी वेतन उठाना नहीं भुलती हैं।
विधालय परिसर की अनियमितता व स्वच्छता पर सवाल पूछना ही गलत होगा क्योंकि सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के इन विधालयों में किसी अधिकारी का भय ही नहीं होता। शायद इसी कारण से इसकी व्यवस्था तो दयनीय है ही शिक्षकों की मनमानी भी अव्वल है।
ग्रामीणों के द्वारा बताया गया कि शिक्षिका खुशबु कुमारी को विधालय में कोई पढ़ाते देखा ही नहीं है और जल्दी कोई पहचान भी नहीं सकता क्योंकि वो आती ही नहीं है। सालों साल से वो विधालय में कभी आई ही नहीं है।
वहीं जब विधालय के सहायक शिक्षक अनुज कुमार से शिक्षिका खुशबु कुमारी के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने जो जवाब दिया वो काफी है किसी भी सिस्टम को झकझोरने के लिए। बतौर शिक्षक अनुज कुमार के अनुसार शिक्षिका कई वर्षों से विधालय से गायब हैं। वो पढ़ाने के लिए नहीं बल्कि 4 से 6 माह पर सिर्फ अपनी हाजिरी बनाने आती हैं। जिसमें विधालय के प्रधानाध्यापक अख्तर हुसैन और विभाग की भी मिलीभगत है। जिसके कारण शिक्षिका भयमुक्त होकर विधालय से गायब रहती हैं।
वहीं एक अन्य शिक्षक हस्समुद्दीन मियां थोड़े बीच बचाव करके बताया कि विभाग ही जानता है कि वो आती हैं या नहीं। वो कभी कभी आती थी। वो रजिस्टर के जांच का हवाला देकर गोल मोल जवाब देते रहें क्योंकि एक तरफ एक शिक्षिका पर सवाल था दूसरे तरफ उसको सह देने वाले प्रधानाध्यापक पर संदेहास्पद भूमिका का सवाल था। पर जिस तरह से वो जवाब देते देखें गए वो कहीं ना कहीं जांच की मांग कर रहे थे।
वहीं प्रधानाध्यापक अख्तर हुसैन ने बताया कि वो पढ़ाने आती हैं तो अपनी हाजिरी बनाती हैं। जब वो अनुपस्थित रहती हैं तब उनकी हाजिरी नहीं बनती है। साथ ही उन्होंने बिना कैमरे पर यह बताया कि 3 मार्च से 1 अप्रैल तक वो अवैतनिक अवकाश पर थी और 2 अप्रैल से बिना लिखित आवेदन के हैं। परन्तु वहीं जब कैमरे पर उनसे पूछा गया तो वो बताने लगे कि शिक्षिका ने मोबाइल पर मैसेज दिया था कि वो विधालय नहीं आएंगी पर कितने दिनों तक नहीं आएंगी यह शायद नहीं बताया होगा।
मीडिया की पड़ताल की खबर शिक्षिका खुशबु कुमारी को लगती है और वो 20 अप्रैल बुधवार को विधालय पढ़ाने के लिए उपस्थित हो जाती हैं। और जब उनसे बात की गई तो उन्होंने बताया कि वो विधालय पढ़ाने आती हैं और आज वो विधालय आई हैं। कौन क्या बोलता है उससे कोई मतलब नहीं वो पढ़ाने आती हैं। पढ़ाने आने के दरम्यान ही हाजिरी बनाई जाती है। सारी बातें बेबुनियाद है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या जब तक किसी विधालय में मीडिया नहीं जाएगी तब तक सालों साल से गायब शिक्षक व शिक्षिका पढ़ाने नहीं आएंगे और जब मीडिया पहुंचेगी तो तत्काल अपनी शिक्षा की सेवा की तत्परता दिखा दी जाएगी और विधालय के प्रति अपनी प्रेम व निष्ठा भी भरपूर प्रकट की जाएगी। पर आपकी शिक्षा के प्रति दिए गए धोखा से विधालय के छात्र छात्राओं का भविष्य अंधकारमय हो सकता है। ऐसे में शिक्षकों व ग्रामीणों के दिए ब्यान की जांच होनी चाहिए और विधालय के नाम पर लूटने खसोटने की नियत को खत्म करनी चाहिए।
