प्राइवेट स्कूलों में कॉपी-किताबों से लेकर ड्रेस तक में कमिशन का खेल शुरू !
संवाददाता/कर्माटांड़
झारखंड तहरीक ए उर्दू तंजीम के अध्यक्ष अलीमुद्दीन अंसारी ने कहा है कि मोटी फीस और किताब व स्कूल ड्रेस के नाम पर कमीशनखोरी से अभिभावकों की कमर टूट रही है। उच्च शिक्षा की तो बात क्या है। पढ़ाई की शुरुआत करने वाले बच्चे पर भी इतना खर्च हो रहा है कि घर का दूसरा खर्च एक तरफ और एक महीने की फीस तथा कापी किताबों की कीमत एक तरफ स्थिति किसी से छिपी नहीं है इसके बावजूद विभाग और सरकार की खामोशी समझ से परे है।एक तरफ शिक्षा को हर किसी तक पहुंचाने के लिए शिक्षा का अधिकार जैसे कानून लागू हो रहे है और दूसरी तरफ शुरुआत की सामान्य पढ़ाई भी पहुंच से बाहर हो रही है। इन दिनों स्कूलों में दाखिलों का दौर चल रहा है। ऐसे में दाखिला फीस स्कूल ड्रेस, कापी, किताब और बस्ते के खर्च को मिलाकर हिसाब किताब की जो लिस्ट अभिभावकों को मिल रही है उसे देखकर तो दिन में ही तारे नजर आ रहे है और पैरों के नीचे से जमीन खिसक रही है। नए सत्र से कई स्कूलों ने फीस भी बढ़ा दी है, तो ऐसे में बोझ भी बढ़ना तय है। महंगाई ने पहले ही जीना मुहाल किया हुआ है। ऐसे में शिक्षा के बढ़ते खर्च ने तो हर किसी के होश उड़ा दिए है। कापी, किताबों व स्कूल ड्रेस में मोटा कमीशन हरेक स्कूल का किताबों व ड्रेसों की दुकानों से सीधा समझौता है। समझौता कमीशन का है। यही वजह है कि स्कूल संचालकों ने किताबों व ड्रेसों की दुकानों को बांध रखा है। इस दुकान के अलावा किसी दूसरी दुकान पर किताबें व ड्रेस नहीं मिल पाएंगी। बात चाहे इसमें शहर के नामचीन स्कूलों की हो या फिर दूसरे पब्लिक स्कूलों की तमाम स्कूल तो अपने ही स्कूल से किताबें व ड्रेसे बेच रहे हैं। कमीशन का खेल इतना गहरा हो गया है कि पेन, पेसिल से लेकर पूरा कोर्स खरीदने पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूली की जा रही है। अभिभावकों से वसूली जाने वाली मोटी रकम का हिस्सा स्कूल संचालकों की जेब तक पहुंच रहा है।
