भारत सरकार के कला संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित संस्कृतिक स्त्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में भाग ले रहे बिहार के दस शिक्षकों ने बिहार के विभिन्न कला एवं संस्कृति को प्रदर्शित किया।
बिहार के शिक्षक रूमित रौशन ने कहा कि पंद्रह दिनों में सभी राज्यों को एक एक दिन अपने राज्य की कला संस्कृति प्रदर्शन का मौका दिया गया, जिसमें बिहार के शिक्षकों के द्वारा हस्तशिल्पो, परिधान, खानपान, पर्यटन स्थल, नदियों, महान हस्तियों, लेखकों, फसल एवं व्रत त्यौहार की चर्चा बहुत ही खूबसूरत ढंग से की गई, जिससे प्रेक्षागृह में मौजूद दसों राज्य के शिक्षक अभिभूत हों गए। शिक्षक रूमित रौशन ने कहा कि बिहार की लोककला एवं संस्कृति ने हमेशा राज्य को गौरवांवित किया है।
जब छठ का मंचन हुआ तो दर्शक दीर्घा से एक ही आवाज थी हमें भी बिहार बुलाओ. बिहार खुद में एक भारत है बस उसे दुनियां को बताने की जरूरत है।
*एक मंच दिखा पूरा बिहार, यह रहा खास*
छठ की पूरी मंचन में ठेकुआ बनाने,नहाने खाने, खरना, डूबते उगते सूर्य की आराधना को दिखाया गया । शिक्षक रूमित रौशन ने सभी राज्य के प्रतिभागियो को बताया कि बिहार एक मात्र ऐसा राज्य है जहाँ के लोक पर्व में बेटी मांगने की गीत है ,यह पुरे देश के लिये बड़ा सन्देश है जहाँ एक और भ्रूण हत्याएँ हों रही हो।
बिहार के लोगों की आस्था से जुड़ी चीजें और विशिष्ट खान-पान की भी झलक ने लोगो को आकर्षित किया.
ठेकुआ, गुड़ के टिकरी और लिट्टी शिक्षक अरविन्द बिहार से लेकर गए थे जिसके स्वाद को सभी ने चखा एवं आह्लादित हुए।
*बिहार झलक में खास नृत्य ने तालियां बटोरी*
जाट जटिन नृत्य में रूमीत रौशन व निधि चौधरी के साथ सभी ने अपना जलवा बिखेरा वही झिझया गीत ब्रह्म बाबा तोहरे खातिर.....पर थिरके रूमित,प्रियंका, निधि के साथ पूरी टीम । अइसन आपन ह बिहार की प्रस्तुति पर प्रेक्षागृह में मौजूद दसों प्रदेश के सभी दर्शक अभिभूत हो और उनके जुबां पर सिर्फ रूमित रूमित का नारा रहा।
*समापन समारोह "शाला सिद्धि" में फाइनल प्रेजेंटेशन हेतु रूमित रौशन के समूह का चयन हुआ।*
समापन समारोह शाला सिद्धि में 7 समूहों में से फाइनल प्रेजेंटेशन हेतु बिहार के शिक्षक रूमित रौशन के समूह का चयन होना बिहार के साथ चंपारण वासियों हेतु भी गर्व का विषय रहा।इनके समूह के प्रदर्शन का निदेशक श्री ऋषि वशिष्ठ एवं उप निदेशक डॉ राहुल कुमार ने भूरि भूरि प्रशंसा की एवं इनके उज्जवल भविष्य एवं शिक्षा में कठपुतली के प्रयोग हेतु इन्हे शुभकामनाएं प्रेषित कर इन्हे प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया।


