पूर्वी चंपारण मोतीहारी/The Royal News.
मोतिहारी:- छठ व्रत, सुहाग, संतान, सुख, सौभाग्य और सुखमय जीवन की कामना के लिए किया जाता है।
लोकआस्था के महापर्व छठ के दूसरे दिन आज 'खरना' मनाया गया। इस अवसर पर छठी मैया को खुश करने के लिए व्रतियों ने निर्जला रहकर शाम में मन से प्रसाद बनाया। अधिकतर व्रती मिट्टी के चूल्हे पर और आम की लकड़ी जलाकर गुड़ और चावल की खीर बनाती हैं। खीर के साथ रोटी भी बनती है, इसमें मौसमी फल केला जरूर शामिल किया जाता है और केले के पत्ते पर रखकर छठ माता को चढ़ाया जाता है। इसके बाद व्रती खुद इस प्रसाद को ग्रहण करके परिवार के बाकी लोगों को प्रसाद बांटती हैं।
छठ में खरना का विशेष महत्व है। खरना का अर्थ है शुद्धिकरण। शुद्धिकरण केवल तन नहीं, बल्कि मन का भी होता है। इसलिए खरना के दिन केवल रात में भोजन करके छठ के लिए तन-मन को व्रती शुद्ध करते हैं। साथ ही जो प्रसाद बनता है, उसे नए चूल्हे पर बनाया जाता है। खीर का प्रसाद महिलाएं अपने हाथों से ही पकाती हैं। इस दिन महिलाएं सिर्फ एक ही समय भोजन करती हैं।
छठ महापर्व की लोकप्रियता आज देश-विदेश तक देखने को मिलती है। छठ पूजा का व्रत कठिन व्रतों में एक होता है। इसमें पूरे चार दिनों तक व्रत के नियमों का पालन करना पड़ता है और व्रती पूरे 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं।
छठ का यह पर्व श्रद्धा और आस्था से जुड़ा होता है। कि जो व्यक्ति इस व्रत को पूरी निष्ठा और श्रद्धा से करता है। उनकी मनोकामना पूरी होती हैं।
छठ व्रत, सुहाग, संतान,सुख सौभाग्य और सुखमय जीवन की कामना के लिए किया
जाता है। मान्यता है कि आप इस व्रत में जितनी श्रद्धा से नियमों
और शुद्धता का पालन करेंगे छठी मईया आपसे उतनी ही प्रसन्न
होंगी। इसमें उपस्थित निर्मला श्रीवास्तव,रोहित कुमार, अनु कुमारी, बबिता श्रीवास्तव,अरुण श्रीवास्तव,वंदना श्रीवास्तव सहित सभी लोग उपाथित रहे।
