अंतरराष्ट्रीय वैदिक ज्योतिष आचार्य डॉ. बाल्मीकि प्रसाद को मिला "हिन्द गौरव सम्मान" THE ROYAL NEWS//
बुधवार, जनवरी 08, 2025
मोतिहारी :- देश के प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय वैदिक ज्योतिषाचार्य और आध्यात्मिक गुरु आचार्य डॉ. बाल्मीकि प्रसाद को मध्यप्रदेश के उज्जैन में आयोजित एक भव्य समारोह में "हिन्द गौरव सम्मान" से सम्मानित किया गया। पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड स्थित नयागांव निवासी डॉ. प्रसाद ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से न केवल जिले का, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। यह सम्मान उज्जैन की पवित्र नगरी में मां शारदा ज्योतिषधाम अनुसंधानम, इंदौर के तत्वावधान में आयोजित 34वें दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वैदिक ज्योतिष एवं वास्तु महासम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया। इस आयोजन के संस्थापक पंडित दिनेश गुरु जी ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया। यह भव्य आयोजन उज्जैन के थ्री स्टार होटल श्री राजाराम पैलेस में संपन्न हुआ, जिसमें देश-विदेश के 500 से अधिक ज्योतिषाचार्य, वास्तु विशेषज्ञ, अंकज्योतिषी, टैरो रीडर और आयुर्वेद विद्वानों ने भाग लिया। सम्मेलन में वैदिक ज्योतिष और वास्तु के विभिन्न आयामों पर चर्चा की गई और नए शोध कार्यों पर प्रकाश डाला गया। "हिन्द गौरव सम्मान" ग्रहण करने के बाद डॉ. बाल्मीकि प्रसाद ने आयोजकों, विशेष रूप से पंडित दिनेश गुरु जी और उनकी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस सम्मान को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण क्षण बताते हुए कहा, "यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि मेरे जिले और देश के हर उस व्यक्ति का है जो वैदिक परंपरा और संस्कृति को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रहा है।" डॉ. प्रसाद ने जिले और देशवासियों को भी धन्यवाद दिया, जिनकी प्रार्थनाओं और स्नेह ने उन्हें इस मंच तक पहुंचने में मदद की। डॉ. बाल्मीकि प्रसाद की इस उपलब्धि से पूरे पूर्वी चंपारण जिले में हर्ष का माहौल है। स्थानीय निवासियों और उनके अनुयायियों ने इसे जिले की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक बताया। डॉ. प्रसाद का जीवन ज्योतिष, आध्यात्मिकता और समाजसेवा के क्षेत्र में समर्पित रहा है, और यह सम्मान उनके कार्यों की एक सशक्त पहचान है। दो दिवसीय इस सम्मेलन को देशभर से आए विद्वानों और प्रतिभागियों ने अत्यंत सफल और ज्ञानवर्धक बताया। आयोजकों ने इसे भारतीय संस्कृति और ज्योतिष विद्या के प्रसार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। डॉ. बाल्मीकि प्रसाद को "हिन्द गौरव सम्मान" से नवाजा जाना उनके वर्षों की मेहनत, वैदिक ज्योतिष और समाजसेवा के प्रति समर्पण का परिणाम है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके अनुयायियों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि यह भारतीय वैदिक परंपरा की प्रासंगिकता और महत्ता को भी उजागर करती है।
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