इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए उत्तर प्रदेश के जौनपुर से प्रवीण कुमार भारती को विशेष रूप से बुलाया गया है, जो कारीगरों को सीप हस्तकला की कला में प्रशिक्षित करेंगे। कार्यक्रम के अंतर्गत 30 आर्टिजन्स को रोजाना छह घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षित कारीगरों को एक दिन का 300 रुपये वेतन भी दिया जाएगा, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से भी लाभ होगा।
स्थानीय कारीगरों को मिलेगा आत्मनिर्भर बनने का मौका-मेहसी ब्लॉक में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ पर सीप से बने ज्वेलरी और सजावट के सामान का पारंपरिक रूप से निर्माण किया जाता है। इस क्षेत्र में लगभग 1000 कारीगर पहले से ही सीप से जुड़े हस्तशिल्प कार्य में लगे हुए हैं। प्रशिक्षण से प्राप्त नए कौशल के बाद इन कारीगरों को अपने उत्पादों को बेहतर बनाने और स्थानीय स्तर पर ही बिक्री बढ़ाने का अवसर मिलेगा। महिलाओं को इस कार्यक्रम से खास लाभ मिलेगा, क्योंकि अब वे घर बैठे ही सीप से बनी ज्वेलरी और सजावटी सामान बना सकती हैं और इससे 500 से 1000 रुपये प्रतिदिन की आय अर्जित कर सकती हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का भी एक सशक्त अवसर मिलेगा।
आर्थिक उन्नति के रास्ते में एक कदम और आगे-हस्तशिल्प सहायक निदेशक विभूति कुमार झा ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित कारीगरों को विभाग की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी और यह बताया कि किस प्रकार सीप से बने सामानों को बाजार में बेचकर बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। उनका कहना था, "इस प्रकार के प्रशिक्षण से कारीगरों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और वे अपने कौशल को और बेहतर बना सकेंगे।
सफलता की ओर बढ़ता मेहसी ब्लॉक- इस कार्यक्रम को लेकर कारीगरों में उत्साह का माहौल है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली कारीगरों में जया देवी, नफीसा, तरन्नुम और सिया देवी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण उनके लिए काफी लाभकारी सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब वे मेहसी में ही सीप के उत्पाद बना सकते हैं, और इसके लिए उन्हें दूर-दराज के शहरों या समुद्री इलाकों में जाने की आवश्यकता नहीं है।
क्राफ्ट पर्सन वसीम हैदर ने भी इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए हस्तशिल्प सहायक निदेशक विभूति कुमार झा का धन्यवाद किया और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से मेहसी ब्लॉक में हस्तशिल्प के क्षेत्र में एक नई दिशा मिलेगी।
निष्कर्ष: यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल कारीगरों के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगा, बल्कि यह सीप हस्तकला को पुनर्जीवित करने और उसे बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में भी मदद करेगा। भविष्य में यदि इस प्रकार के कार्यक्रम अन्य क्षेत्रों में भी लागू किए जाएं, तो यह स्थानीय कारीगरों को एक नई पहचान दिलाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।


