संवाददाता: साबिर अली
बगहा में NH-727 से जुड़ने वाले आधा दर्जन गांव के लोग यातायात के परेशानी से जूझ रहे हैं। यह परेशानी सिसवा बसंतपुर गांव के पास बना पुल ध्वस्त हो जाने के कारण है। आधा दर्जन गांव में लगभग 25 हजार लोग निवास करते हैं। दवा से लेकर रोजमर्रा की चीजों के लिए इन गांवों के लोगों को परसौनी, बगहा या बेतिया जाना पड़ता है। आम दिनों में यहां के लोग छोटी गाड़ियों से किसी तरह से गांव से बाहर निकल कर अपना काम कर लेते हैं।
यहां के ग्रामीणों का मानें तो नेशनल हाईवे से सिसवा गांव तक जोड़ने के लिए सड़क बनाई गई, जिसकी लंबाई 2 किलोमीटर है। इस सड़क पर एक पुल बनाया गया था, जो ध्वस्त हो गया। लोगों ने बताया कि नेशनल हाईवे को जुडने के लिए इस गांव से तीन रास्ते हैं। जिसमें दो रास्तों में पुल नहीं होने के कारण आम दिनों में लोग चचरी पुल बना कर किसी तरह से अपना काम चला लेते हैं। वही तीसरे रास्ते से जाने पर लोगों को अपने जिला में जाने के लिए 13 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। हालांकि तीनों रास्ते बरसात के दिनों में बंद हो जाते हैं। लेकिन बरसात के दिनों में यहां पर लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता है।
ऐतिहासिक है सिसवा बाजार
स्थानीय लोग बताते हैं कि सिसवा बाजार 90 के दशक में उत्तर बिहार का दूसरा सबसे बड़ा अनाज की मंडी हुआ करता था। 90 के दशक में यहां क्रिमिनल का दबदबा बढ़ा जिसके बाद यहां की मंडी टूटने लगी। बिहार में क्राइम खत्म होने के साथ दें इस बाजार का फिर उत्थान शुरू हुआ। लेकिन खराब रास्ता होने के कारण बाजार स्थापित नहीं हो सका।
इस गांव के लोग होते हैं परेशान
पुल नहीं बनने के कारण सिसवा बसंतपुर, जामदार टोला, बरवा, डोबी टोला, सिसवा, परोवहा, डुमरा, बढ़ई टोला के लोग परेशान रहते हैं। इन टोला की कुल आबादी लगभग 20 हजार बताई जा रही है। लोगों ने बताया कि बरसात के दिनों में समस्या और बढ़ जाता है।