बस्तर | छत्तीसगढ़ | The Royal News
बस्तर से लेकर तेलंगाना तक फैला माओवादी नेटवर्क अब निर्णायक रूप से कमजोर पड़ चुका है। दशकों से देश के लिए चुनौती बने लाल आतंक के अंत की ‘रिवर्स काउंटडाउन’ यानी उल्टी गिनती शुरू हो गई है। हालिया सुरक्षा अभियानों में मारे गए 60 लाख रुपये के इनामी माओवादियों की पहचान के बाद माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, लगातार सटीक रणनीति, इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन और क्षेत्र में बढ़ते दबाव के कारण माओवादियों का शीर्ष नेतृत्व बिखरता जा रहा है। बस्तर क्षेत्र में हुए हालिया एनकाउंटरों में मारे गए इनामी माओवादी संगठन के अहम रणनीतिकार माने जा रहे थे। सूत्रों का कहना है कि माओवादी नेटवर्क की कमर तोड़ने में सुरक्षा बलों की निरंतर घेराबंदी, सप्लाई लाइन पर चोट और स्थानीय स्तर पर विश्वास निर्माण की रणनीति ने निर्णायक भूमिका निभाई है। संगठन के भीतर भय और अविश्वास का माहौल है, जिससे कई निचले स्तर के कैडर आत्मसमर्पण की ओर बढ़ रहे हैं।बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जैसे इलाकों में लगातार चल रहे अभियानों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि माओवादी हिंसा अब अंतिम चरण में है। सुरक्षा बलों का दावा है कि आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे और कार्रवाई देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह दबाव बना रहा, तो माओवादी संगठन का अस्तित्व सीमित क्षेत्रों तक सिमट जाएगा और लाल आतंक का अध्याय इतिहास बन सकता है।

